Lal Bahadur Shastri part-2
स्वतंत्रता पश्चात राजनीतिक यात्रा:-
स्वतंत्रता पश्चात, शास्त्री जी को गोविंद वल्लभ पंत केेे मंत्रिमंडल में मंत्री बनाया गया और उन्हें पुलिस एवं परिवहन मंत्रालय सौंपा गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने महिलाओं की बस कंडक्टर के तौर पर नियुक्ति की, और पुलिस को निर्देश दी कि वह उद्दंड भीड़ को तितर-बितर करनेे के लिए लाठी के बजाय पानी की बौछारों का इस्तेमाल करें।
वर्ष 1951 में लाल बहादुर शास्त्री नई दिल्ली चले आये एवं केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई विभागों का प्रभार संभाला। उन्होंने रेल मंत्री, परिवहन एवं संचार मंत्री वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री, गृहमंत्री जैसे कई महत्वपूर्ण पद संभाले। लाल बहादुर शास्त्री जी, जवाहरलाल नेहरु जी के बीमारी के दौरान बिना किसी कारण के मंत्री भी रहे। उनकी कर्तव्यनिष्ठा और सत्यपरायणता के कारण उनकी प्रतिष्ठा लगातार बढ़ती रही। जब वह रेल मंत्री थे उस दौरान एक रेल दुर्घटना हुई, इस दुर्घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए 1956 में त्यागपत्र दे दिया। 1962 में उन्हें पुनः मंत्रिमंडल में शामिल किया गया और ग्रह मंत्री बनाया गया। उनकी साफ-सुथरी छवि के कारण उन्हें 1964 में प्रधानमंत्री बनाया गया।
" आजादी की रक्षा केवल सैनिकों का काम नहीं है। पूरे देश को मजबूत होना होगा"
प्रधानमंत्री काल:-
लाल बहादुर शास्त्री ने 9 जून 1964 को भारत के दूसरे प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। प्रारंभ में उन्होंने विदेश मामले, आणविक ऊर्जा विभाग एवं मंंत्रालय अपने पास रखें, लेकिन बाद में उन्होंने विदेश मंत्रालय स्वर्ण सिंह को सौंंप दिया।
प्रधानमंत्री के तौर पर, शास्त्री जी ने नेहरू मंत्रिमंडल के मंत्रियों को बनाए रखा, लेकिन साथ ही नेहरु की पुत्री, इंदिरा गांधी को भी सूचना एवं प्रसारण मंत्री के तौर पर अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया। वह नेहरू का सम्मान करते थे। उन्होंने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री द्वारा तैयार आम नीतियों को जारी रखा लेकिन उन्होंने नेहरू जी का अंधानुकरण नहीं किया। शास्त्री जी पहले प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने प्रधानमंत्री को सलाह देने के लिए सचिव (एवं. के. झा एवं वरिष्ठ आईसीएम अधिकारी) की नियुक्ति की। इस प्रकार उन्होंने आगे चलकर प्रधानमंत्री सचिवालय या प्रधानमंत्री कार्यालय का रुप लेनें वाले संस्थान की नींव रखी।
" हम सिर्फ अपने लिए ही नहीं बल्कि समस्त विश्व के लिए शांति और शांतिपूर्ण विकास में विश्वास रखते हैं"
चुनौतियां :-
1. मद्रास राज्य में व्यापक हिंसात्मक हिंदी भाषा विरोध प्रदर्शन
2. व्यापक खाद्यान्न कमी
3. पाकिस्तान के साथ दूसरा युद्ध
1. मद्रास राज्य में व्यापक हिंसात्मक हिंदी भाषा विरोधी प्रशासन:-
यह विरोध प्रदर्शन हिंदी को थोपे जाने के खिलाफ था और इसके बाद भारत ने अपनी भाषा नीति बदल कर अंग्रेजी को सहायक भाषा का दर्जा दिया।
मद्रास राज्य में हिंसा को रोकने के लिए आठवीं अनुसूची का
सहारा लिया जिसमें 14 भाषाएंं थी उसमें से एक तमिल भाषा भी शामिल है।
2. व्यापक खाद्यान्न कमी:-
भारत उस समय भोजन की कमी से जूझ रहा था और स्थितियां बेहद विकट थी जब शास्त्री जी ने सी. सुब्रमण्यम को खाद्य एवं कृषि मंत्री के तौर पर अपने मंत्रालय में शामिल किया। जिन्होंने हरित क्रांति श्वेत क्रांति का सुझाव दिया।
3. पाकिस्तान के साथ दूसरा युद्ध:-
10 सितंबर 1965 में भारत और पाकिस्तान का युद्ध हुआ। शास्त्री जी भारतीय फौजियोंं को जरूरी कदम उठानेे की अनुमति दी। संयुक्त राष्ट्र नेे इसमें हस्तक्षेप किया और सीजफायर के लिए मध्यस्थता कि गई जिसे 23 सितंबर 1965 को दोनों पक्षों नेेे स्वीकार लिया
ताशकंद में पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के साथ युद्ध ना करने की घोषणा की और समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद उनकी मृत्यु हो गई। उन्हें मरणोपरांत वर्ष 1966 मैं भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया। शास्त्री जी को उनकी सादगी, देश भक्ति और ईमानदारी के लिए आज भी पूरे भारत में श्रद्धा पूर्वक याद करते हैं।

Very nice useful information regarding lala bahadur shastri 👍
जवाब देंहटाएंशास्त्री जी के प्रेरणादायी जीवन का विस्तृत उल्लेख करके आपने अत्यंत सराहनीय कार्य किया है जिसके लिए आप बधाई के पात्र हैं।
जवाब देंहटाएंIndeed True democracy of masses can not come through violent and untruthful.
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